हर हर महादेव
नरसिंह उवाच
बसई दारापुर की कहानी
अपने पूर्वजों के पाप की सजा अब हर बेटी को चुकानी पड़ेगी।12 मई जब पूरी दिल्ली के हिन्दू राष्ट्रवाद को समर्पित थे,तब दिल्ली के बसई दारापुर गाँव में एक बाप अपनी बेटी को अस्पताल से घर ला रहा था।घर के पास कुछ मुसलमान शिकारी जिनकी किताब ने उन्हें समझा रखा है की काफिर की बेटी तो उनके लिये माले गनीमत है,उन्होंने अपने माल अर्थात काफिर की बेटी को छेड़ दिया।उस अभागी काफिर लड़की का अभागा बाप राजू त्यागी ये जानता ही नहीँ था की जिन्हें वो अपना किरायेदार मानता है,वो कुरआन के मुताबिक किरायेदार नहीँ बल्कि पूरी धरती के मालिक हैं।
2 किरायेदारों जहांगीर खान और मोहम्मद आलम और उनके साथियों ने इलाके के रसूखदार जमीदारो की नाक के नीचे उन्ही के खानदान के राजू त्यागी को चाकू से गोद कर मार डाला।
और उनका पुत्र भी चाकू की मार से घायल गम्भीर अवस्था मे जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रहा है।
ज्ञात रहे घटना दिल्ली के बसई दारा पुर गांव की है जो कि त्यागियों की एकता और बल का गढ़ माना जाता है।
पर उनके गढ़ में सेंध लग चुकी है।
आज राजू त्यागी जी की आत्मा स्वर्ग में अपने पूर्वजों को जा कर अवश्य बताएगी की जो बीज तुम बो आये थे उसका पेड़ बन चुका और हमको फल भी मिलने लगे।
इलाके के बुजुर्ग लोग हैरानी व्यक्त कर रहे थे।
भाई पिछले 40 से में ऐसा पहली बार हुआ है।
पर सच्चाई ये है कि पहली बार हुआ है आखिरी बार नहीं।
बिगुल बज चुका।
तुम भले युद्ध मे इंट्रेस्ड न हो पर युद्ध तो आपकी और बढ़ रहा है।
और हाँ जाते जाते एक बात और जिस गांव में जमीन बाहर के व्यक्ति को जल्दी से बेचने की परंपरा तक नहीं होती वहां मस्जिद के लिए जमीन देने वाला कैसे और किन स्तिथियों में मिल जाता है इसपे मंथन होना चाहिए।
और
दिल्ली के अन्य गांवों को इससे कुछ सबक लेना चाहिए।
बसई वालो ने मादी पुर वालो से सबक लिया होता तो आज ये स्तिथि न होती।
अब आपके गांव की बारी है।
हर हर महादेव जी
14 मई 2019
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Tuesday, 14 May 2019
बसई दारापुर की कहानी
Saturday, 11 May 2019
माँ बगलामुखी जयंती की लाख लाख शुभकामनाये
हर हर महादेव

नरसिंह उवाच
आज विजय और सद्बुद्धि की देवी माँ बगलामुखी की जयंती है।माँ बगलामुखी की जयंती प्रत्येक वर्ष वैशाख शुक्ल पक्ष की अष्टमी को मनाई जाती है।माँ बगलामुखी योद्धाओं की माँ हैं।आज तक सनातन धर्म में जितने भी महान योद्धा हुए हैं वो माँ महाकाली या माँ बगलामुखी के ही उपासक रहे हैं।वस्तुतः माँ महाकाली और माँ बगलामुखी एक ही शक्ति के दो स्वरूप हैं।माँ के अन्य अनेक स्वरूप भी हैं।परन्तु अपने शत्रुओं पर विजय की इच्छा रखने वाले कर्मशील धर्मप्रेमी गण सदैव माँ महाकाली या माँ बगलामुखी की शरण लेते हैं और माँ की कृपा से शत्रुओं का विनाश करते हैं।माँ बगलामुखी की पूजा उपासना करने वाले को कभी भी शक्ति,वैभव,धन,यश और संतान की कमी नहीँ होती और माँ बगलामुखी का भक्त कभी भी श्रीविहीन नही हो सकता।माँ बगलामुखी को माँ पीताम्बरा भी कहते हैं।मानव रूप में इस पृथ्वी पर भगवान परशुराम ने सर्वप्रथम माँ पीताम्बरा बगलामुखी की पूजा और वो माँ और महादेव की कृपा से अजेय और चिरंजीवी बने।उन्होंने ही अपने शिष्यों के माध्यम से माँ बगलामुखी को विश्व में पूजित करवाया और उन्होंने ही रावण वध के लिये भगवान श्रीराम को माँ पीताम्बरा बगलामुखी की शरण में जाने का परामर्श दिया और विधि समझाई।जब तक सनातन धर्मी माँ और महादेव की पूजा करते रहे, और अन्धविश्वास को अपना कर नए नए देवी देवता गढ़ लिये और माँ और महादेव की उपेक्षा कर दी तो माँ और महादेव ने भी उन्हें त्याग दिया और संपूवो विश्व में अजेय और सर्वशक्तिमान बने रहे और जब उन्होंने पाखण्ड र्ण सनातन धर्म दुर्गति को प्राप्त हो गया। पर अभी बहुत देर नहीँ हुई है।माँ और महादेव हमारे माता पिता हैं।जिस दिन हम अपनी गलतियों को स्वीकार करके उनकी शरण के चले जॉएगे,उसी दिन से हम फिर अजेय हो जाएंगे।
अतः एक सन्यासी होने के नाते से मैं यति नरसिंहानन्द सरस्वती आप सभी से अनुरोध करता हूँ की आइये हम सब मिलकर सनातन धर्म की ओर लौट चले।
आइये हम सब मिलकर अपने माँ और महादेव की शरण में चलें।
माँ हम सबको सद्बुद्धि और पुरुषार्थ दें और महादेव हमारे वंश की रक्षा करें।
आप सभी को माँ बगलामुखी जयंती की लाख लाख शुभकामनाये ।
- यति नरसिंहानन्द सरस्वती,
12 मई 2019
Thursday, 9 May 2019
"जीवित हिन्दुओ से एक प्रश्न"
नरसिंह वाणी
"जीवित हिन्दुओ से एक प्रश्न"
मैं यति नरसिंहानन्द सरस्वती रोज सोशल मीडिया पर कभी केरल और कभी बंगाल और कभी दिल्ली में हिन्दुओ पर हो रहे अत्याचारों पर बड़ी बड़ी पोस्ट दिखाई देती हैं और ये अच्छी बात है।हमे आवाज उठानी ही चाहिये अपने भाई और बहनों के लिये।हममें से बहुत कम लोग केरल या पश्चिमी बंगाल जा पाते हैं परंतु फिर भी उनके लिये आवाज उठाते हैं, ये वास्तव में बहुत बड़ी बात है।
कल मैं उज्जैन में था । उज्जैन महाकाल मंदिर सनातन धर्म की अमूल्य धरोहर है।शायद ही कोई सनातन धर्मी हो जो महाकाल के दर्शन करने ना गया हो और जो अभी तक कर नहीँ पाया,वो भी जरूर करना चाहता है।कल 8 मई को मुझे भी महाकाल के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ।मैं वहाँ जाकर एक तरह से पागल सा हो गया।पूरा महाकाल मंदिर मुस्लिम आबादी से घिर चूका है।पत्रकारों ने मुझे बताया की अब हर वर्ष वहाँ कांवड़ लाने वालो पर हमला किया जाता है। 15 साल वहाँ हिंदूवादियों की सरकार थी और अब वहाँ घोर मुस्लिम समर्थक सरकार है।किसी हिन्दू धर्मगुरु ने,किसी संत ने,किसी हिन्दू संगठन ने कहीँ कोई विरोध नहीँ किया। हिंदूवाद का अर्थ इस इस या उस पार्टी के हित में काम करना ही हो चूका है।हम अपने अस्तित्व को खोने के कगार पर आ चुके हैं क्योंकि हमें अपने बच्चों और अपने धर्म से नहीँ बल्कि नेताओ की दलाली से प्रेम है।अब परमात्मा हमारी रक्षा क्यों करेंगे?
Sunday, 28 April 2019
नरसिंह वाणी "सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता
इनाम रुपये 1 लाख तक...
Sponsored BY Narsingh Vani
आज्ञा से... - यति नरसिंहानन्द सरस्वती
शिवशक्ति धाम डासना जिला गाज़ियाबाद की तरफ से सभी सनातन धर्म के मानने वालों के लिये सामान्य ज्ञान की एक प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है।इसके लिये सभी प्रतियोगियों को नीचे दी हुई कहानी को ध्यान से पढ़ना है और इस कहानी के बाद पूछे गए कुछ प्रश्नों के उत्तर YouTube चैनल "Narsingh vani" और "नरसिंह वाणी'' Facebook Page पर इस कहानी के कमेंट बॉक्स में देने हैं । यह प्रतियोगिता आज 28 / 04 / 2019 से ही आरम्भ है । सही जवाब देने वाले प्रथम सौ विजेताओं का शिवशक्ति धाम डासना में भव्य अभिनन्दन किया जायेगा और उन्हें पुरुस्कार स्वरुप एक हजार रुपया और प्रामाणिक सनातन धर्म ग्रन्थों का एक सेट प्रदान किया जायेगा । सभी सनातन धर्म के मानने वालों से अनुरोध है की इस प्रतियोगिता में अवश्य भाग लें व अपने उत्तर के साथ अपना मोबाइल नं - [ +91- ■■■ ] व पता भी भेजें ....
कहानी
एक ज्ञानी,परोपकारी,मानवता प्रेमी और पुरुषार्थी जनसमुदाय ने धर्म के शाश्वत सिद्धान्त तय किये औऱ सारे विश्व में अपने पराक्रम औऱ पुरुषार्थ से विश्वगुरु के रूप ने विज्ञान, ज्ञान और धर्म का प्रचार प्रसार किया । उन्होंने अपने वंशजो के लिये अभूतपूर्व गौरवशाली विरासत छोड़ी।परन्तु उनके ये वंशज अपने पूर्वजों जितने पराक्रमी और पुरुषार्थी नहीँ निकले और यह जनसमुदाय धीरे धीरे अपने गौरव को खोने लगा।एक समय ऐसा आया की कातिलों की एक फ़ौज ने जनसमुदाय के करोड़ो लोगो का कत्ल कर दिया और जनसमुदाय से उसकी धरती का बहुत बड़ा भाग छीन लिया। यह जनसमुदाय ने अपना सारा प्रभुत्व खोकर एक छोटे से किले में सिमट गया।कातिलों की फ़ौज ने उस किले को चारों तरफ से घेर लिया है।किले के सबसे पहले रक्षक जिन्हें कातिलों से लड़ने के लिये नियुक्त किया गया था वो कातिलों की फ़ौज से मिल गए है और उन्होंने सद्भावना और मानवता के नाम पर कातिलों को बड़ी संख्या में किले में बसा लिया है।अब किले के अंदर बसे हुए कातिल सब काम छोड़कर रात दिन ज्यादा से ज्यादा बच्चे पैदा करने पर लगे हुए हैं ताकी किले पर अंदर से ही कब्जा करके जनसमुदाय को समाप्त कर दें।कातिलों ने जनसमुदाय के विभिन्न जातियों के प्रभावशाली लोगो में अपने बहुत से मित्र बना लिये हैं जो अपने व्यक्तिगत स्वार्थो के लिये कातिलों को शांतिप्रिय और मानवतावादी घोषित करके उन्हें जनसमुदाय को समाप्त करने में पूरा सहयोग दे रहे हैं लेकिन जनसमुदाय में अभी भी इतनी शक्ति है की वो अगर लड़ने को तैयार हो जाये तो कातिलों की फ़ौज सहित सारे गद्दारो को धूल धूसरित कर सकते हैं।किले में अभी अनन्त काल तक चलने लायक रसद और अन्य सामग्री है।किले में रहने वाले जनसमुदाय ने एक व्यक्ति पर भरोसा करके उसे प्रधानसेवक बना कर किले की सारी व्यवस्था की जिम्मेदारी दे दी है।प्रधानसेवक को यह जिम्मेदारी जनसमुदाय की रक्षा के लिये बने स्वयंसेवी संगठन और जनसमुदायों के धर्म के आचार्यो के कहने पर दी गयी है।इन सबने जनसमुदाय को यह विश्वास दिलाया है की वो सभी गद्दारो सहित कातिलों की फ़ौज को नष्ट करके जनसमुदाय को उसका प्राचीन गौरव वापस दिलाएंगे।अब समुदाय के धर्माचार्य और धर्मगुरु समुदाय को भरोसा दिला रहे हैं की समुदाय को अपनी पूरी ताकत भगवान का स्मरण,भजन, कीर्तन,रास रंग और मंदिर निर्माण में लगा देनी चाहिये।धर्माचार्य बता रहे हैं की जनसमुदाय को निश्चिन्त होकर भक्ति और प्रेम में सराबोर रहना चाहिये क्योंकि भगवान भगवान भक्ति और प्रेम में ही है और सदैव अपने भक्तों की रक्षा करता है।जनसमुदाय की रक्षा के लिये बने स्वयंसेवी संगठन ने किले के अंदर रहने वाले कातिलों को प्रेम और अहिंसा सिखाने के लिये प्रचारकों की एक फ़ौज तैयार कर ली है जो प्रचुर मात्रा में धन,साधन और जनसमुदाय की महिलाएं कातिलों को देकर उन्हें अपना दामाद बना रहे हैं और जनसमुदाय को भरोसा दिला रहे हैं की कातिलों के साथ जनसमुदाय पूरी तरह से सुरक्षित है।यदि कातिल नहीँ रहेंगे तो जनसमुदाय का अस्तित्व नहीँ रहेगा।प्रधानसेवक जो स्वयं भी इस महान संगठन का प्रचारक है,वो भी हर तरह से जनसमुदाय के साधनों को छीनकर कातिलों के लिये पक्के मकान बनवा रहा है,कातिलों को पढ़ने और काम करने के लिये बड़ी मात्रा में धन और साधन उपलब्ध करवा रहा है।कातिलों के धर्मगुरूओ ने प्रधानसेवक को समझाया है की कातिलों की गरीबी के कारण ही किले का ठीक से विकास नहीँ हो पा रहा है।उनकी बात मानकर प्रधानसेवक ने अपने संगठन की नीतियों का पालन करते हुए बडी मात्रा में कातिलों को फ़ौज,पुलिस और प्रशासनिक पदों पर भर्ती कर रहा है।जनसमुदाय के ज्यादातर लोग प्रधानसेवक की नीतियों से खुश हैं और उन्हें पूरा विश्वास है की प्रधानसेवक और उनकी रक्षा के लिये बना हुआ संगठन जनसमुदाय को उसका प्राचीन गौरव वापस दिलाकर बहुत जल्दी विश्वगुरु बना देगा। जनसमुदाय के धर्मगुरु और साधारण व्यक्ति अपने प्रधानसेवक से पूरी तरह संतुष्ट हैं।
लेकिन इसी किले में एक नकली धर्मगुरु टाइप का आदमी रहता है जो झगड़ालू, चिड़चिड़ा और घिनौना है।कुछ मुर्ख और अज्ञानी किस्म के लोग जो संख्या में बहुत थोड़े हैं, इस व्यक्ति को अपना गुरु भी मानते है।ये लोग इस व्यक्ति के लिये सदैव मरने मारने पर उतारू रहते हैं।जनसमुदाय के अधिकतर लोग इस व्यक्ति को जिद्दी,अहंकारी,झगड़ालू,दुष्ट और अज्ञानी मानते हैं।पहल यह व्यक्ति जनसमुदाय की रक्षा के लिये के लिये बने स्वयमसेवी संगठन का ही था और प्रधानसेवक को उसके पद तक पहुँचाने में बहुत बड़ा सहायक रहा था।इस व्यक्ति का मानना था की जनसमुदाय को सबसे बड़ा खतरा किले के अंदर बढ़ रही कातिलों की तादात से हैं। अगर कातिल इसी तरह बढ़ते रहे तो एक दिन वो किले पर कब्जा कर लेंगे और जनसमुदाय खत्म हो जायेगा इसीलिये किले के अंदर ऐसा कानून बनाना चाहिये की कातिलों की आबादी नियंत्रित की जा सके।स्वयमसेवी संगठन के सबसे बड़े नेता ने इस व्यक्ति से वादा किया था की यदि प्रधानसेवक को जिम्मेदारी मिली तो सबसे पहला काम यही कानून बनाना ही होगा।इस व्यक्ति ने उनकी बात पर विश्वास करते हुए अपनी पूरी ताकत उनके साथ लगा दी।तब तक तो यह व्यक्ति सही था और लोकप्रिय भी था।इस व्यक्ति ने प्रधानसेवक से पहले किले के सत्ताधीशों से लड़ते हुए 31 बार जेल काटी और सौ से ज्यादा रात हवालात में बिताई। परंतु मूल रूप से यह व्यक्ति विघ्नसंतोषी था।प्रधानसेवक के जिम्मेदारी सँभालते ही इसने संगठन पर दबाब बनाना शुरू कर दिया और जगह जगह जाकर धरना संसद करके धर्मगुरूओ को बरगलाना शुरू कर दिया की प्रधानसेवक ने अगर यह कानून नहीँ बनाया तो बहुत जल्दी जनसमुदाय का अस्तित्व मिट जाएगा।टीवी की हजारो डिबेट में,जगह जगह सभा करके,पदयात्रा करके यह व्यक्ति यही चिल्लाने लगा।इसके जोर जोर से चिल्लाने पर बहुत से लोगो ने इसकी बात को सच समझ लिया और वो भी यही मांग करने लगे।उसका चिल्लाना कातिलों को और जनसमुदाय की रक्षा करने वाले स्वयमसेवी संगठनों को और जनसमुदाय के धर्मगुरूओ को अखरने लगा।उन्होंने एक बहुत बड़ा प्रचार तंत्र इस पाखण्डी को फ़साने और बदनाम करने के लिये लगा दिया। और तो और इस व्यक्ति ने कातिलों के धर्मग्रन्थ को पढ़कर और कातिलों के इतिहास को समझकर जनसमुदाय से यह भी कहना शुरू कर दिया की यह कभी भी जनसमुदाय को जीवित नहीँ छोड़ेंगे।उसके इस अनर्गल प्रलाप को सुनकर जनसमुदाय का रक्षक संगठन और प्रधानसेवक के अनुयायी तिलमिला गये और उन्होंने इस व्यक्ति को विक्षिप्त और गद्दार घोषित कर दिया।परन्तु यह व्यक्ति इतने पर ही नहीँ रुका। इसने जनसमुदाय की धार्मिक मान्यताओं पर भी कुठाराघात करते हुए धर्म की अलग व्याख्या करनी आरम्भ कर दी।इसने कहा की भगवान धर्म के लिये लड़ने और मर मिटने वालो की रक्षा करते हैं न की धर्म के नाम पर रोने वालो की,गाने वालो की और रास रचाने वालो की।इसने कहा कि जनसमुदाय के पूर्वज अपने पराक्रम और पुरुषार्थ के कारण विश्वगुरु बने ना की ढोंग और अहिंसा के कारण।इस हिंसक व्यक्ति का कहना है की जनसमुदाय गाँधी की नीतियों पर चलकर नहीं बल्कि श्रीराम,कृष्ण और परशुराम की शत्रुहन्ता नीतियों पर चलकर ही महान और विश्वगुरु बन सकता है।इस व्यक्ति ने प्रधानसेवक और महान संगठन की नीतियों पर प्रश्नचिन्ह लगाने का कार्य करते हुए किले की शांति को अभूतपूर्व हानि पहुँचाई।कातिलों को इस व्यक्ति से बहुत घृणा है और वो किसी भी कीमत पर इसको कत्ल करना चाहते हैं।जनसमुदाय के बहुत से धर्मगुरु भी इस व्यक्ति को धर्म के लिये खतरा मानते हैं।प्रधानसेवक के समर्थकों ने इसको जनसमुदाय से अलग थलग करने का पूरा अभियान चला रखा है।परंतु यह व्यक्ति किसी भी बात से विचलित न होकर किले में अशांति फैला रहा है।
अब आपके प्रश्न शुरू होते है :-
1.इस कथा में किस जनसमुदाय की बात हो रही है ?
2.इस कथा में जो किला है,उसका वास्तविक नाम क्या है ?
3.इस कथा में किन कातिलों की बात हो रही है ?
4.वो लोग वास्तव में कौन हैं जिन्होंने कातिलों को किले में जगह दी ?
5.वो लोग वास्तव में कौन हैं जो अपनी अपनी जातियो के नेता बन कर कातिलों से मिल गए ?
6.इस कथा में जिस स्वयमसेवी संगठन का जिक्र है,उसका असली नाम क्या है ?
7.प्रधानसेवक का असली नाम क्या है?8.प्रधानसेवक और संगठन कितने दिनों में जनसमुदाय को विश्वगुरु बना देंगे ?
9.प्रधानसेवक और संगठन कितनी बहन बेटियो को कातिलों को देकर उन्हें अहिंसक बना देंगे ।
10.प्रधानसेवक कितना धन,साधन,नौकरी,घर और शक्ति देकर कातिलों को अहिंसक बना देंगे ?
11.इस कहानी के खलनायक का असली नाम क्या है ?
12.यह व्यक्ति किस कारण से किले की शांति व्यवस्था को बर्बाद करने पर तुला है ?
13.किसके कहने पर यह व्यक्ति जनसमुदाय की धार्मिक मान्यताओं पर कुठाराघात कर रहा है ?
14.किले की शांति और जनसमुदाय की कातिलों से मित्रता के बीच में विघ्न डाल रहे इस व्यक्ति की आपके हिसाब से क्या सजा होनी चाहिये ?
15.आपको क्या लगता है की इस व्यक्ति का अंत कातिलों के हाथ से कत्ल होकर होना चाहिये या जेल में सड़ाकर इसे मारना चाहिये ?
....दिनाँक - 28 / April / 2019
Monday, 24 December 2018
नरसिंह संदेश
"नरसिंह सन्देश"
🙏🏽🙏🏽🙏🏽 हर हर महादेव 🙏🏽🙏🏽🙏🏽
"हर पत्थर करता रहा,कायम निज पहचान।
धीरे धीरे हो गयी ये बस्ती बेजान।।"
रोज एक नया त्यौहार और रोज एक नया देवता,हिन्दुओ अपने मानसिक दिवालियापन से निकल कर सोचो तो सही की हम कर क्या रहे हैं?
अपने दोष दुसरो पर डाल कर,उन्हें नीचा दिखाने की कोशिश करके अपने अस्तित्व को खत्म करके हमे क्या मिलेगा?
हमारी पहचान सफाई और सादगी है,हम क्रिसमस का विरोध तो कर रहे हैं पर सच तो ये है की हमने दीपावली को क्रिसमस बनाने में कोई कसर नही छोड़ी है।
नकल के लिये भी अक्ल चाहिये,हमने इस बात को सच करके दिखाया है।
बात बहुत गहरी है,अगर समझने की कोशिश करोगे तो बहुत अच्छा है वरना गाली तो मैं खाता ही रहता हूँ।
..................................25 दिसम्बर 2018
🙏🏽🙏🏽🙏🏽 हर हर महादेव 🙏🏽🙏🏽🙏🏽
"हर पत्थर करता रहा,कायम निज पहचान।
धीरे धीरे हो गयी ये बस्ती बेजान।।"
रोज एक नया त्यौहार और रोज एक नया देवता,हिन्दुओ अपने मानसिक दिवालियापन से निकल कर सोचो तो सही की हम कर क्या रहे हैं?अपने दोष दुसरो पर डाल कर,उन्हें नीचा दिखाने की कोशिश करके अपने अस्तित्व को खत्म करके हमे क्या मिलेगा?
हमारी पहचान सफाई और सादगी है,हम क्रिसमस का विरोध तो कर रहे हैं पर सच तो ये है की हमने दीपावली को क्रिसमस बनाने में कोई कसर नही छोड़ी है।
नकल के लिये भी अक्ल चाहिये,हमने इस बात को सच करके दिखाया है।
बात बहुत गहरी है,अगर समझने की कोशिश करोगे तो बहुत अच्छा है वरना गाली तो मैं खाता ही रहता हूँ।
..................................25 दिसम्बर 2018
Tuesday, 4 December 2018
कुरान और इस्लामिक इतिहास के परिपेक्ष में शरीयत और शरिया कानून को समझने का समय - यति नरसिंहानन्द सरस्वती
प्रेस विज्ञप्ति
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यति नरसिंहानन्द सरस्वती जी ने सभी हिन्दू धर्मगुरुओ और मुस्लिम धर्मगुरूओ,मौलानाओ व विद्वानों को शिवशक्ति धाम डासना में दिया शास्त्रार्थ का निमंत्रण
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अखिल भारतीय संत परिषद के राष्ट्रीय संयोजक यति नरसिंहानन्द सरस्वती जी महाराज ने आज सुप्रसिद्ध हिन्दू विचारक विनोद सर्वोदय,समाजसेवी डॉ आर के तोमर,बाबा प्रमेन्द्र आर्य,अक्षय त्यागी,अनिल यादव, प्रमोद कुमार बंसल,सतीश गर्ग,सतेंद्र त्यागी,अरुण त्यागी तथा अन्य साथियों के साथ एक प्रेस वार्ता को सम्बोधित किया ।
प्रेस वार्ता में यति नरसिंहानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा की अब समय आ चुका है की पूरी दुनिया कुरान और इस्लामिक इतिहास के परिपेक्ष में शरीयत और शरिया कानून को समझने की कोशिश करें। बुलन्दशहर के दरियापुर में हुए तीन दिनी इज्तेमा ने आज बिल्कुल स्पष्ट कर दिया है की भारत पर शरीयत और शरिया कानून के बस कुछ की कदम दूर है।
जिस तरह से भारत में केवल हिन्दुओ की वोटो से बनी पूर्ण बहुमत की हिंदूवादी सरकार और उनके मूल मार्गदर्शक संगठन आरएसएस ने इस्लामिक कट्टरपंथ के सामने घुटने टेक कर दयनीय समर्पण किया है,उससे यह स्पष्ट हो गया है कि अब भारतवर्ष में कोई भी राजनैतिक दल इस्लामिक जिहाद से टक्कर नहीं लेगा। अब भारतवर्ष के हिन्दुओ सहित सभी काफिरो को जिसमे ईसाई, बौद्ध, जैन, सिक्ख, पारसी,यहूदी सभी शामिल हैं, उन्हें बहुत गम्भीरता के साथ पूरी दुनिया के मुस्लिम देशों में हुए काफिरो के दर्दनाक अंत का अध्ययन करना चाहिये। ताकि वो भी उस खौफनाक समय के लिये खुद को तैयार कर सकें।
उन्होंने कहा की आज पूरी दुनिया मे इस्लामिक जिहाद के नाम पर जो भी कत्लोगारत हो रहा है उसके लिये मुसलमान बिल्कुल भी दोषी नहीं है क्योंकि वो केवल वही कर रहे हैं जो कुरान और इस्लाम ने उन्हें सिखाया है। यदि कोई मुस्लिम धर्मगुरु या मौलाना यह कहता है की ये खूनखराबा इस्लामिक नही है तो वो झूठ बोलता है क्योंकि वास्तव में इस्लाम ये ही है और इनका दर्शन भी यही कहता है। अगर वो मेरी बात से सहमत नहीं हैं तो मै उन्हें एक खुशनुमा और स्वस्थ बहस की चुनौती देता हूँ ।
इस्लाम के नाम पर हुए इस राक्षसी हिंसा के जिम्मेदार सनातन धर्म के धर्मगुरु हैं जिन्होंने कभी भी सनातन धर्म के मूल सिद्धांतो को दुनिया के सामने नही रखा।सनातन धर्म के धर्मगुरुओ की कायरता, अकर्मण्यता और धर्म के मौलिक सिद्धांतो से विश्वासघात के कारण इस्लामिक जिहाद पूरी दुनिया मे फैला है । हमारा धर्म कहता है की सन्यासी को लोभ,लालच,भय,अहंकार और मोह का परित्याग करके हर हालत में अपने धर्म की रक्षा करनी चाहिये।हमारे सनातन के सन्यासी सब कुछ कर रहे हैं, परंतु अपने धर्म के अनुयायियों को स्वाभिमान से जीना और धर्म के लिये मर मिटने के लिए सजग नही करते। राजनैतिक तंत्र आज यदि इतना हिन्दू विरोधी हुआ है तो इसका कारण भी केवल यही है की सनातन के धर्मगुरूओ ने अपनी गरिमा खो दी और राजनैतिक लोगो का गुरु बनने की जगह उनके शिष्य या यूँ कहिये की दलाल बन गए और सारे धर्म को बर्बाद कर दिया।
अगर कोई हिन्दू धर्मगुरु मुझसे सहमत नहीँ है तो मैं उसे शिवशक्ति धाम डासना में शास्त्रार्थ करने का निमंत्रण देता हूँ । यह शास्त्रार्थ सारे दुनिया में फेसबुक और यूट्यूब के माध्यम से प्रसारित किया जायेगा
कुरान और इस्लामिक इतिहास के परिपेक्ष में शरीयत और शरिया कानून को समझने का समय - यति नरसिंहानन्द सरस्वती
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यति नरसिंहानन्द सरस्वती जी ने सभी हिन्दू धर्मगुरुओ और मुस्लिम धर्मगुरूओ,मौलानाओ व विद्वानों को शिवशक्ति धाम डासना में दिया शास्त्रार्थ का निमंत्रण
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अखिल भारतीय संत परिषद के राष्ट्रीय संयोजक यति नरसिंहानन्द सरस्वती जी महाराज ने आज सुप्रसिद्ध हिन्दू विचारक विनोद सर्वोदय,समाजसेवी डॉ आर के तोमर,बाबा प्रमेन्द्र आर्य,अक्षय त्यागी,अनिल यादव, प्रमोद कुमार बंसल,सतीश गर्ग,सतेंद्र त्यागी,अरुण त्यागी तथा अन्य साथियों के साथ एक प्रेस वार्ता को सम्बोधित किया ।
प्रेस वार्ता में यति नरसिंहानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा की अब समय आ चुका है की पूरी दुनिया कुरान और इस्लामिक इतिहास के परिपेक्ष में शरीयत और शरिया कानून को समझने की कोशिश करें। बुलन्दशहर के दरियापुर में हुए तीन दिनी इज्तेमा ने आज बिल्कुल स्पष्ट कर दिया है की भारत पर शरीयत और शरिया कानून के बस कुछ की कदम दूर है।
जिस तरह से भारत में केवल हिन्दुओ की वोटो से बनी पूर्ण बहुमत की हिंदूवादी सरकार और उनके मूल मार्गदर्शक संगठन आरएसएस ने इस्लामिक कट्टरपंथ के सामने घुटने टेक कर दयनीय समर्पण किया है,उससे यह स्पष्ट हो गया है कि अब भारतवर्ष में कोई भी राजनैतिक दल इस्लामिक जिहाद से टक्कर नहीं लेगा। अब भारतवर्ष के हिन्दुओ सहित सभी काफिरो को जिसमे ईसाई, बौद्ध, जैन, सिक्ख, पारसी,यहूदी सभी शामिल हैं, उन्हें बहुत गम्भीरता के साथ पूरी दुनिया के मुस्लिम देशों में हुए काफिरो के दर्दनाक अंत का अध्ययन करना चाहिये। ताकि वो भी उस खौफनाक समय के लिये खुद को तैयार कर सकें।
उन्होंने कहा की आज पूरी दुनिया मे इस्लामिक जिहाद के नाम पर जो भी कत्लोगारत हो रहा है उसके लिये मुसलमान बिल्कुल भी दोषी नहीं है क्योंकि वो केवल वही कर रहे हैं जो कुरान और इस्लाम ने उन्हें सिखाया है। यदि कोई मुस्लिम धर्मगुरु या मौलाना यह कहता है की ये खूनखराबा इस्लामिक नही है तो वो झूठ बोलता है क्योंकि वास्तव में इस्लाम ये ही है और इनका दर्शन भी यही कहता है। अगर वो मेरी बात से सहमत नहीं हैं तो मै उन्हें एक खुशनुमा और स्वस्थ बहस की चुनौती देता हूँ ।
इस्लाम के नाम पर हुए इस राक्षसी हिंसा के जिम्मेदार सनातन धर्म के धर्मगुरु हैं जिन्होंने कभी भी सनातन धर्म के मूल सिद्धांतो को दुनिया के सामने नही रखा।सनातन धर्म के धर्मगुरुओ की कायरता, अकर्मण्यता और धर्म के मौलिक सिद्धांतो से विश्वासघात के कारण इस्लामिक जिहाद पूरी दुनिया मे फैला है । हमारा धर्म कहता है की सन्यासी को लोभ,लालच,भय,अहंकार और मोह का परित्याग करके हर हालत में अपने धर्म की रक्षा करनी चाहिये।हमारे सनातन के सन्यासी सब कुछ कर रहे हैं, परंतु अपने धर्म के अनुयायियों को स्वाभिमान से जीना और धर्म के लिये मर मिटने के लिए सजग नही करते। राजनैतिक तंत्र आज यदि इतना हिन्दू विरोधी हुआ है तो इसका कारण भी केवल यही है की सनातन के धर्मगुरूओ ने अपनी गरिमा खो दी और राजनैतिक लोगो का गुरु बनने की जगह उनके शिष्य या यूँ कहिये की दलाल बन गए और सारे धर्म को बर्बाद कर दिया।
अगर कोई हिन्दू धर्मगुरु मुझसे सहमत नहीँ है तो मैं उसे शिवशक्ति धाम डासना में शास्त्रार्थ करने का निमंत्रण देता हूँ । यह शास्त्रार्थ सारे दुनिया में फेसबुक और यूट्यूब के माध्यम से प्रसारित किया जायेगा
Friday, 30 November 2018
यति नरसिंहानन्द सरस्वती जी महाराज को कमजोर और अकेला समझने की गलती न करे मोदी सरकार - यति माँ चेतनानंद सरस्वती
प्रेस विज्ञप्ति
यति नरसिंहानन्द सरस्वती जी महाराज को कमजोर और अकेला समझने की गलती न करे मोदी सरकार ~ यति माँ चेतनानंद सरस्वती
हम मोदी के घर उसकी माँ के सामने जाकर अनशन करेंगे-राजबाला तोमर
*************************
शिवशक्ति धाम डासना में 30 दिन से कठोर जनसँख्या नियंत्रण कानून की मांग को लेकर आमरण अनशन कर रहे यति नरसिंहानन्द सरस्वती जी महाराज के समर्थन में आज जगदम्बा महाकाली डासना वाली के परिवार की महिलाओं ने गाज़ियाबाद जिला मुख्यालय पर विरोध प्रदर्शन किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आक्रोश प्रदर्शित किया।महिलाओ ने अपने रक्त से पत्र लिखकर भी नरेंद्र मोदी को ज्ञापन के रूप में जिलाधिकारी द्वारा भेजा।
महिलाओ के रक्त से लिखे गए ज्ञापन में मोदी सरकार को प्रचण्ड नारी आंदोलन की चेतावनी दी गयी और उन्हें ये बताया गया की यति नरसिंहानन्द सरस्वती जी महाराज को अकेला समझने की गलती न करे मोदी सरकार।आज यति नरसिंहानन्द सरस्वती कुछ देश द्रोही मुस्लिम परस्त नेताओ को छोड़कर बाकी 100 करोड़ हिन्दुओ की आवाज हैं।उनकी आवाज यदि नहीं सुनी गयी तो जगदम्बा महाकाली डासना वाली के परिवार की महिलाएँ गुजरात जाकर नरेंद्र मोदी के घर जाकर उनकी माँ के सामने अनशन करेंगी और उनसे अपने बच्चों की जान की भीख मांगेगी।
ज्ञापन देते समय शिवशक्ति धाम डासना की महंत यति माँ चेतनानन्द सरस्वती जी ने कहा की हिन्दू के लिये गूंगी बहरी हो चुकी सरकार को जगाने के लिये जो कुछ भी करना पड़ेगा,हम वो सब करने को तैयार हैं।हम अपना दर्द मोदी जी की माँ को बतायेगे और उनसे कहेंगे की वो अपने बेटे से कहे की जिन सौ करोड़ हिन्दुओ ने उन्हें इतना मान, सम्मान और गौरव दिया हैं, उन्हें अपने वोट बैंक की राजनीति के लिये इस तरह धोखा न दे वरना इतिहास उन्हें कभी क्षमा नहीं करेगा।
चौधरी अंजली आर्या ने कहा यति नरसिहानन्द सरस्वती जी की मांग देश हित में है सभी हिन्दू महिलाएं चीन की तरह भारत में भी कठोर जनसंख्या नियंत्रण कानून बनवाने के
पक्ष में है यदि शीतकालीन सत्र के प्रथम दिन जनसंख्या नियंत्रण कानून को लेकर चर्चा नही हुई तो भारतीय जनता पार्टी को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।जो सरकार जी एस टी,एस सी एस टी एक्ट, तीन तलाक पर मजबूत फैसले ले सकती है वो क्यों देश के भविष्य के लिये जनसँख्या नियंत्रण कानून नही बना रही है,ये हमारी समझ से परे है।
आज प्रदर्शन करने वालो में जयवंती देवी, ओमकारी , सरोज देवी, माया देवी, सुनिता , बबली , विमला , राजबाला कौशिक तथा अन्य महिलाये शामिल थी !
30 नवम्बर 2018....
यति नरसिंहानन्द सरस्वती जी महाराज को कमजोर और अकेला समझने की गलती न करे मोदी सरकार ~ यति माँ चेतनानंद सरस्वती
हम मोदी के घर उसकी माँ के सामने जाकर अनशन करेंगे-राजबाला तोमर
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प्रेस विज्ञप्ति -सौंपते हुए ''यति माँ चेतनानन्द सरस्वती , राजबाला तोमर व अन्य |
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शिवशक्ति धाम डासना में 30 दिन से कठोर जनसँख्या नियंत्रण कानून की मांग को लेकर आमरण अनशन कर रहे यति नरसिंहानन्द सरस्वती जी महाराज के समर्थन में आज जगदम्बा महाकाली डासना वाली के परिवार की महिलाओं ने गाज़ियाबाद जिला मुख्यालय पर विरोध प्रदर्शन किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आक्रोश प्रदर्शित किया।महिलाओ ने अपने रक्त से पत्र लिखकर भी नरेंद्र मोदी को ज्ञापन के रूप में जिलाधिकारी द्वारा भेजा।
महिलाओ के रक्त से लिखे गए ज्ञापन में मोदी सरकार को प्रचण्ड नारी आंदोलन की चेतावनी दी गयी और उन्हें ये बताया गया की यति नरसिंहानन्द सरस्वती जी महाराज को अकेला समझने की गलती न करे मोदी सरकार।आज यति नरसिंहानन्द सरस्वती कुछ देश द्रोही मुस्लिम परस्त नेताओ को छोड़कर बाकी 100 करोड़ हिन्दुओ की आवाज हैं।उनकी आवाज यदि नहीं सुनी गयी तो जगदम्बा महाकाली डासना वाली के परिवार की महिलाएँ गुजरात जाकर नरेंद्र मोदी के घर जाकर उनकी माँ के सामने अनशन करेंगी और उनसे अपने बच्चों की जान की भीख मांगेगी।
ज्ञापन देते समय शिवशक्ति धाम डासना की महंत यति माँ चेतनानन्द सरस्वती जी ने कहा की हिन्दू के लिये गूंगी बहरी हो चुकी सरकार को जगाने के लिये जो कुछ भी करना पड़ेगा,हम वो सब करने को तैयार हैं।हम अपना दर्द मोदी जी की माँ को बतायेगे और उनसे कहेंगे की वो अपने बेटे से कहे की जिन सौ करोड़ हिन्दुओ ने उन्हें इतना मान, सम्मान और गौरव दिया हैं, उन्हें अपने वोट बैंक की राजनीति के लिये इस तरह धोखा न दे वरना इतिहास उन्हें कभी क्षमा नहीं करेगा।
चौधरी अंजली आर्या ने कहा यति नरसिहानन्द सरस्वती जी की मांग देश हित में है सभी हिन्दू महिलाएं चीन की तरह भारत में भी कठोर जनसंख्या नियंत्रण कानून बनवाने के
पक्ष में है यदि शीतकालीन सत्र के प्रथम दिन जनसंख्या नियंत्रण कानून को लेकर चर्चा नही हुई तो भारतीय जनता पार्टी को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।जो सरकार जी एस टी,एस सी एस टी एक्ट, तीन तलाक पर मजबूत फैसले ले सकती है वो क्यों देश के भविष्य के लिये जनसँख्या नियंत्रण कानून नही बना रही है,ये हमारी समझ से परे है।
आज प्रदर्शन करने वालो में जयवंती देवी, ओमकारी , सरोज देवी, माया देवी, सुनिता , बबली , विमला , राजबाला कौशिक तथा अन्य महिलाये शामिल थी !
30 नवम्बर 2018....
Tuesday, 20 November 2018
20 साल बाद का भारत
20 साल बाद का भारत...
( जनसँख्या नियंत्रण कानून क्यों जरूरी है ?? )
रोज की तरह आज भी लगभग सुबह पौने पाँच बजे, तेज शोर से अचानक नींद खुल गई!!.. अजान हो रही थी !!..
अब मस्जिदे बहुत ज्यादा दूरी पर नही रह गई थी। हर मोहल्ले में मिलने वाले पार्क अब मस्जिदों का रूप ले चुके है !!.. अजान ही अब अलार्म बन चुकी थी !!..
हमने नित्य कर्म किया और सुबह की सैर को चल पड़े !!..
अब सड़के 20 साल पहले वाली सड़के नही रह गई थी, स्वच्छ !.. अब सड़को पर जगह जगह अंडों के छिलके पड़े रहना आम बात थी !.. छिलकों से बचते हुए सड़क पार करने में ही, योगा हो जाया करता था !!..
योग सिर्फ कहावतों और कहानी किस्सों में बचा था !.. संविधान में नए कानून के तहत योग को 'हराम' घोषित किया जा चुका था !..
योग अब बैन था !!..
हम घर पहुंचे !. बच्चे स्कूल जाने को तैयार हो चुके थे !..
कुर्ता पजामा और जालीदार टोपी !..
अब स्कूलों की यही यूनिफॉर्म थी !!.. हम बच्चों को कुर्ता पजामा और टोपी पहनाकर स्कूल छोड़ने चले गए !!..
वापिस आये तो श्रीमती जी ने कहा, जाइये सब्जी ले आइये !..
अब सब्जियों के मार्केट काफी कम हो गए थे !..
जहां तहाँ, सिर्फ मछली,मटन,अंडों की दुकानें। बीच मे एक दो सब्जी के ठेले !!..
अब एक ही ठेले पे मछली, अंडे, सब्जी सब साथ होती थी !.
एक ही तराजू पे मछली भी तुलती थी, और सब्जी भी !!.. मन पक्का कर हम ले आये सब्जी !!..
श्रीमती जी ने खाना बनाया और हम खाकर, दफ्तर की और चल दिये !!..
अब दफ्तर वो 20 साल पहले वाले दफ्तर नही थे !!.. जब दफ्तर की शुरुआत में राष्ट्रगान होता था और समापन पर राष्ट्रीय गीत !!..
दफ्तर की शुरुआत अजान से हुई !!..
हमने अजान पढ़ी और काम मे लग गए !.. दफ्तर का समय खत्म हुआ !.. नियमानुसार नमाज हुई !...
हमने नमाज पढ़ी और घर आ गए !!..
तब तक बच्चे भी स्कूल से आ चुके थे !.. कोचिंग क्लासेस जाने की तैयारी कर रहे थे !!.. उर्दू स्पोकन क्लासेस !!..
जी अब सारे मार्केट की दुकानों के नाम और सूचना पट उर्दू में ही लिखे जाते थे !!..
उर्दू सीखना अब जरूरी भी था और मजबूरी भी !!..
बच्चे कोचिंग चले गए !.. हम श्रीमती जी के साथ टेलीविजन देखने लगे.. सीरियल के नाम भी बदल गए थे !.. खाला हो तो ऐसी, आपकी आपा, बकरा किश्तों पे और नमाज पढ़ने के तरीके जैसे !..
अब इन्हें ही देखना हमारी नियति बन चुकी थी !..
बच्चे कोचिंग से आ गए !.. खाना खाकर अजीब सी जिद करने लगे !..
पापा पापा बहुत दिन हो गए मन्दिर गए हुए !!..
अब नेपाल कब जाएंगे ??..
जी अब सबसे नजदीक में मन्दिर नेपाल में ही थे !!..
देश के मंदिर तो गोल गुम्बद बन चुके थे !..
हां हां जाएंगे बेटा जरूर जाएंगे मन्दिर। पर गर्मी की छुठियो में !!..
हमने कहा !!..
ये सुन बच्चे नाराज होकर चले गए !!..
बच्चों की ये हालत देखकर श्रीमतीजी की आंखों से आँसू बहने लगे !!..
हम दोनों 20 साल पहले के अतीत में खो गए .
किस तरह हम आज से 20 साल पहले कालेज की पार्किंग में 'स्वामी यति नरसिंहानंद जी' को गालिया दे रहे थे !!.. उन्हें बांटने वाला दंगाई आतंकी कहकर भला बुरा कह रहे थे !!..
फिर वो कालेज की कैंटीन , जहाँ चाय पी पीकर नरसिंहानंद को गाली दे रहे थे !!..
टेबल पर बैठे हम हमारे ही मुस्लिम दोस्तो से ज्यादा, नरसिंहानन्द के उपर हमारा खून का खौल रहा था ।
हम ऐसे गरियाते जैसे अपने मुस्लिम दोस्तो को खुद के सेक्युलर और लिबरल होने का प्रमाण पत्र दे रहे हो !!..
हमारे कुछ अन्य हिन्दू मित्रो ने हमे समझाया भी था !!.. पर उस समय हमारे ऊपर खुली सोच, मॉर्डनाइजेशन और लिब्रिज्म का नशा छाया हुआ था !!.. ( हमे खुलकर जीना था लेकिन सच्चाई कुछ ऐसी थी हम खुद को सेकुलर बनाते बनाते इस्लाम की शरीयत कानून के गुलाम हो गए और अब तो हममें से कोई कुछ बोलना चाहता है तो उसका गला काटकर सजा दी जाती है )
किस तरह हमने उन हिन्दू मित्रो को पूरे कालेज के सामने अपमानित किया था कि तू सम्प्रदायिक है ब्लडी ओल्ड माइंड हिन्दुज !!..
साम्प्रदायिक कहकर उन्हें बदनाम किया । हमेशा उनसे घ्रणा की !!..
ये सब सोचते सोचते अचानक हमारे मुँह से निकल पड़ा !..
श्रीमती जी काश उस समय कालेज में हमें सेक्युरिज्म का कीड़ा ना काटा होता और आप लिब्रिज्म की चादर ओढ़े ना बैठी होती !!..
तो आज ये दिन ना देखने पड़ते !..
आज हमारे बच्चों की इस हालत के जिम्मेदार कोई और नही, सिर्फ हम है !..
अगर स्वामी नरसिंहानन्द जी का साथ दिया होता तो हिन्दुत्व मरा ना होता और हम खुलकर अपनी जिंदगी जी सकते थे !!..
*********
दोस्तो ये तो सिर्फ एक कल्पना थी ..हक़ीक़त भी बन सकती है.. अतः ये हक़ीक़त ना बने हम सबको स्वामी जी यति नरसिंहानन्द सरस्वती जी का साथ देना होगा..
छद्म सेक्युरिज्म और ढोंगी लिब्रिज्म से बाहर आना होगा !!.. जनसँख्या नियंत्रण क़ानून पर खुलकर समर्थन करना ही होगा यह सम्प्रदायिक नही देश, प्रकृति व बच्चो का भविष्य बचाने के लिए है ,
वरना आने वाली पीढ़ियां हमे कभी माफ नही करेंगी !!
( हो सके तो हर हिन्दू यह शेयर करता जाए और सोचकर देखे क्या होने वाला है हमारे बच्चों का भविष्य ??
जब हमारी बेटियो का जबरन जानवरो की तरह बलात्कार होगा और बेटों खतना होगा )
अज्ञात...
Email - narsinghwani@gmail.com
Email - tanuragrai@gmail.com
( जनसँख्या नियंत्रण कानून क्यों जरूरी है ?? )
रोज की तरह आज भी लगभग सुबह पौने पाँच बजे, तेज शोर से अचानक नींद खुल गई!!.. अजान हो रही थी !!..
अब मस्जिदे बहुत ज्यादा दूरी पर नही रह गई थी। हर मोहल्ले में मिलने वाले पार्क अब मस्जिदों का रूप ले चुके है !!.. अजान ही अब अलार्म बन चुकी थी !!..
हमने नित्य कर्म किया और सुबह की सैर को चल पड़े !!..
अब सड़के 20 साल पहले वाली सड़के नही रह गई थी, स्वच्छ !.. अब सड़को पर जगह जगह अंडों के छिलके पड़े रहना आम बात थी !.. छिलकों से बचते हुए सड़क पार करने में ही, योगा हो जाया करता था !!..
योग सिर्फ कहावतों और कहानी किस्सों में बचा था !.. संविधान में नए कानून के तहत योग को 'हराम' घोषित किया जा चुका था !..
योग अब बैन था !!..
हम घर पहुंचे !. बच्चे स्कूल जाने को तैयार हो चुके थे !..
कुर्ता पजामा और जालीदार टोपी !..
अब स्कूलों की यही यूनिफॉर्म थी !!.. हम बच्चों को कुर्ता पजामा और टोपी पहनाकर स्कूल छोड़ने चले गए !!..
वापिस आये तो श्रीमती जी ने कहा, जाइये सब्जी ले आइये !..
अब सब्जियों के मार्केट काफी कम हो गए थे !..
जहां तहाँ, सिर्फ मछली,मटन,अंडों की दुकानें। बीच मे एक दो सब्जी के ठेले !!..
अब एक ही ठेले पे मछली, अंडे, सब्जी सब साथ होती थी !.
एक ही तराजू पे मछली भी तुलती थी, और सब्जी भी !!.. मन पक्का कर हम ले आये सब्जी !!..
श्रीमती जी ने खाना बनाया और हम खाकर, दफ्तर की और चल दिये !!..
अब दफ्तर वो 20 साल पहले वाले दफ्तर नही थे !!.. जब दफ्तर की शुरुआत में राष्ट्रगान होता था और समापन पर राष्ट्रीय गीत !!..
दफ्तर की शुरुआत अजान से हुई !!..
हमने अजान पढ़ी और काम मे लग गए !.. दफ्तर का समय खत्म हुआ !.. नियमानुसार नमाज हुई !...
हमने नमाज पढ़ी और घर आ गए !!..
तब तक बच्चे भी स्कूल से आ चुके थे !.. कोचिंग क्लासेस जाने की तैयारी कर रहे थे !!.. उर्दू स्पोकन क्लासेस !!..
जी अब सारे मार्केट की दुकानों के नाम और सूचना पट उर्दू में ही लिखे जाते थे !!..
उर्दू सीखना अब जरूरी भी था और मजबूरी भी !!..
बच्चे कोचिंग चले गए !.. हम श्रीमती जी के साथ टेलीविजन देखने लगे.. सीरियल के नाम भी बदल गए थे !.. खाला हो तो ऐसी, आपकी आपा, बकरा किश्तों पे और नमाज पढ़ने के तरीके जैसे !..
अब इन्हें ही देखना हमारी नियति बन चुकी थी !..
बच्चे कोचिंग से आ गए !.. खाना खाकर अजीब सी जिद करने लगे !..
पापा पापा बहुत दिन हो गए मन्दिर गए हुए !!..
अब नेपाल कब जाएंगे ??..
जी अब सबसे नजदीक में मन्दिर नेपाल में ही थे !!..
देश के मंदिर तो गोल गुम्बद बन चुके थे !..
हां हां जाएंगे बेटा जरूर जाएंगे मन्दिर। पर गर्मी की छुठियो में !!..
हमने कहा !!..
ये सुन बच्चे नाराज होकर चले गए !!..
बच्चों की ये हालत देखकर श्रीमतीजी की आंखों से आँसू बहने लगे !!..
हम दोनों 20 साल पहले के अतीत में खो गए .
किस तरह हम आज से 20 साल पहले कालेज की पार्किंग में 'स्वामी यति नरसिंहानंद जी' को गालिया दे रहे थे !!.. उन्हें बांटने वाला दंगाई आतंकी कहकर भला बुरा कह रहे थे !!..
फिर वो कालेज की कैंटीन , जहाँ चाय पी पीकर नरसिंहानंद को गाली दे रहे थे !!..
टेबल पर बैठे हम हमारे ही मुस्लिम दोस्तो से ज्यादा, नरसिंहानन्द के उपर हमारा खून का खौल रहा था ।
हम ऐसे गरियाते जैसे अपने मुस्लिम दोस्तो को खुद के सेक्युलर और लिबरल होने का प्रमाण पत्र दे रहे हो !!..
हमारे कुछ अन्य हिन्दू मित्रो ने हमे समझाया भी था !!.. पर उस समय हमारे ऊपर खुली सोच, मॉर्डनाइजेशन और लिब्रिज्म का नशा छाया हुआ था !!.. ( हमे खुलकर जीना था लेकिन सच्चाई कुछ ऐसी थी हम खुद को सेकुलर बनाते बनाते इस्लाम की शरीयत कानून के गुलाम हो गए और अब तो हममें से कोई कुछ बोलना चाहता है तो उसका गला काटकर सजा दी जाती है )
किस तरह हमने उन हिन्दू मित्रो को पूरे कालेज के सामने अपमानित किया था कि तू सम्प्रदायिक है ब्लडी ओल्ड माइंड हिन्दुज !!..
साम्प्रदायिक कहकर उन्हें बदनाम किया । हमेशा उनसे घ्रणा की !!..
ये सब सोचते सोचते अचानक हमारे मुँह से निकल पड़ा !..
श्रीमती जी काश उस समय कालेज में हमें सेक्युरिज्म का कीड़ा ना काटा होता और आप लिब्रिज्म की चादर ओढ़े ना बैठी होती !!..
तो आज ये दिन ना देखने पड़ते !..
आज हमारे बच्चों की इस हालत के जिम्मेदार कोई और नही, सिर्फ हम है !..
अगर स्वामी नरसिंहानन्द जी का साथ दिया होता तो हिन्दुत्व मरा ना होता और हम खुलकर अपनी जिंदगी जी सकते थे !!..
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दोस्तो ये तो सिर्फ एक कल्पना थी ..हक़ीक़त भी बन सकती है.. अतः ये हक़ीक़त ना बने हम सबको स्वामी जी यति नरसिंहानन्द सरस्वती जी का साथ देना होगा..
छद्म सेक्युरिज्म और ढोंगी लिब्रिज्म से बाहर आना होगा !!.. जनसँख्या नियंत्रण क़ानून पर खुलकर समर्थन करना ही होगा यह सम्प्रदायिक नही देश, प्रकृति व बच्चो का भविष्य बचाने के लिए है ,
वरना आने वाली पीढ़ियां हमे कभी माफ नही करेंगी !!
( हो सके तो हर हिन्दू यह शेयर करता जाए और सोचकर देखे क्या होने वाला है हमारे बच्चों का भविष्य ??
जब हमारी बेटियो का जबरन जानवरो की तरह बलात्कार होगा और बेटों खतना होगा )
अज्ञात...
Email - narsinghwani@gmail.com
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